गुरुजी (Guruji)

गुरु विकास नाथ महाराज जी का संक्षिप्त जीवन परिचय

गुरु जी का जन्म 20 नवम्बर सन 1984 को एक सामान्य परिवार में हुआ, गुरु जी का जन्म का नाम विकास था! परिबारिक लोगो ने बताया की जब गुरु जी का जन्म हुआ था ! उस समय घर में रखी चावल की बोरियो में से खुशबू आने लगी थी ! जब से उनका जन्म हुआ तब से ही उनके परिवार की आर्थिक स्थति अच्छी होने लगी थी! उसी समय उनके पिता जी की सरकारी नौकरी लग गयी! जिसके प्रयास में वे काफी समय से लगे हुए थे! पारिवारिक व पडोसी मित्र भी बताते हे की जब गुरु जी का जन्म हुआ था उस समय पास ही के मंदिर में शंख और घंटियों की आवाज सुनाई दे रही थी !तथा बाताबरण एक दम शांत था ! जेसे किसी संत आत्मा ने जन्म लिया हो इनका परिवार पिछले 6 पीड़ियो से माँ दक्छिनेश्वरी काली की गद्दी लगा के लोगो की सेवा में योगदान देता था !10 वर्ष की अवस्था में आते- आते गुरु जी का भगवानके प्रति समर्पण दिखाई देने लगा वह सुबह शाम काली माता की सेवा में लगे रहते थे!
14वे बर्ष की आयु में आते -आते वह काली माता के अनन्य उपासक हो गये तथा वह भक्तो की परेशानियों को माँ काली की कृपा से दूर करने लगे, लोग बताते है की जब वह गद्दी पर बैठते थे, तब उनमे कुछ समय के लिए माता काली का अंश आता प्रतीत होता था !उस समय वह बैठे-बैठे भक्तो की समस्या का समाधान किया गुरु विकास नाथ महाराज जी का संक्षिप्त जीवन परिचय करते थे,अगले 1-2 सालो तक यह सिलसिला चलता रहा भक्त आते थे और अपनी समस्या का समाधान निकलवाकर हर्षपूर्वक चले जाते थे! 16वे बर्ष में आते-आते गुरु जी में समाज के लिए कुछ करने की इच्छा जाग्रत होने लगी, और वह घर से समाज के कल्याण के लिए निकल पढ़े, इस क्रम में सर्वप्रथम उनका प्रवास नेपाल में रहा 2-3 साल प्रवास के दोरान उन्होंने साधू -सन्तो की सेवा में अपना समय व्यतीत किया इसके पश्चात उन्होंने उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में 7-8 साल भिन्न -भिन्न स्थानों के मठों में रह कर साधू –संतो की सेवा की, तत्पश्चात 30 बर्ष की आयु आते- आते उन्होंने पुन: अपने जन्मस्थान बाज़पुर में प्रवेश किया! यहाँ आके पूर्णतया अपने आप को समाज के प्रति समर्पित कर दिया
जानवरों के प्रति भी उनका करुणा भाब बचपन से ही था, वह अब उन्हें मन ही मन परेशान करने लगा गों माता की दयनीय हालत देखकर उन्होंने राष्टीय दक्छिनेश्वरी गों सेवा ट्रस्ट की स्थापना की, जो 2022 में आते-आते एक समाज सेवी ट्रस्ट के रूप में समाज के सामने आई, इसके अतिरिक्त वह सनातन हिन्दू एकता के लिए समाज के हर आयोजन में बड चढ़ के हिस्सा लेने लगे, उनका मानना था की सनातन धर्म प्राचीन समय से ही समस्त समाज को जोड़ता है! इस आधुनिक समय में जब लोग अपने आपसी कलहो में हिन्दू धर्म को अलग-अलग जाती के रूप में देखने लगे तब इन सब चीजों को गुरु जी ने ध्यान में रखते हुए हिन्दू एकता का नारा दिया और राष्टीय भगवाधारी सेवा सुरक्षा परिषद् की स्थापना की, तथा इसके द्वारा हिन्दू एकता कार्यक्रम तथा धर्म समन्वय कार्यक्रम को प्रोत्साहित करने का कार्य किया हुआ है ! वर्तमान में गुरु जी का निवास स्थान माँ दक्छिनेश्वरी काली सिद्ध पीठ चकरपुर रोड बाजपुर उधम सिंह नगर में है! जहां मंगलवार और शनिवार को भक्तो की आपार भीड़ अपनी समस्याओं को लेकर आती है और गुरु जी भी किसी को निरास न करते हुए सबकी समस्याओ को ध्यान से सुनकर उनका निराकरण करते है !